भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद

(पर्यावरण एवं वन मंत्रालय की एक स्वायत्त निकाय, भारत सरकार)
Select Theme:
इंटरएक्टिव पोर्टल: हितधारकों के साथ इंटरफेस   
मुख्य पृष्ठ» महानिदेशक का संदेश

महानिदेशक का संदेश


भा.वा.अ.शि.प. परिवार की ओर से शुभकामनाएं तथा हमारी वेबसाइट में आपका स्वागत है।   हम इस संस्था के गौरवपूर्ण इतिहास से सम्बनिधत सारभूत सूचना उपलब्ध करवायेगे। मै आपको भा.वा.अ.शि.प. के अतिमहत्वपूर्ण लक्ष्यों तथा संस्थागत शोध क्षेत्रों के द्वारा एक परिचयात्मक दौरे के लिए आमंत्रित करता हूँ। संक्षिप्त विवरण यह है तथा अधिक विस्तार पूर्ण विवरण इस वेबसाइट पर अन्यत्र दिया गया है।


1.भा.वा.अ.शि.प. जैसा कि इसके नाम से ज्ञात होता है मुख्य रूप से वानिकी अनुसन्धान तथा शिक्षा से सम्बनिधत है। क्योंकि भारत में वन प्रबन्धन की प्रकृति विशेष रूप से सरकारी वन भूमियों तथा इसके उपभोक्ताओ से सम्बन्ध रखती है, हमारे कार्य, अध्यादेशित रूप से वन विभागों तथा समुदायों से सम्बंधित होते है जो कि वन संसाधनों से लाभ प्राप्त करते है। इस संस्था के प्रयासों के द्वारा भारत में निजी तथा फार्म भूमियों पर वृक्ष आच्छादन को बढ़ाने के लिए प्रौधोगिकियां विकसित की गई जो कि अब लगभग 93,000 वर्ग किलोमीटर तक फैला हुआ है। इसके अतिरिक्त हम वैश्विक पैमाने पर चुनौतियों जैसे जलवायु परिवर्तन, बढ़ती हुई मानवीय जनसंख्या तथा खाध तथा जल सुरक्षा के प्रति चिन्तित है ।
2.भा.वा.अ.शि.प. देश में शीर्ष संस्था है जो भारत सरकार, राज्य सरकार तथा अन्य पणधारियों जैसे किसानो, उधोगो तथा शैक्षणिक क्षेत्र को वन संरक्षण के क्षेत्र में उभर रही चुनौतियों का सामना करने के लिए वानिकी अनुसन्धान तथा प्रौधोगिकियों से सम्बनिधत मामलों पर परामर्श देती है। हम अन्य देशों जैसे आस्ट्रेलिया, लाओस, कम्बोडिया इत्यादि के साथ सहयोगात्मक अनुसन्धान कर रहे है।

3. परिषद को 1986 में वानिकी सैक्टर में उभरती हुई चुनौतियां का सामना करने के लिए स्वायतता प्रदान की गई। वन अनुसन्धान संस्थान तथा भा.वा.अ.शि.प. के अन्य क्षेत्रीय संस्थानों ने भारत तथा अन्य स्थानों में वैज्ञानिक वानिकी को 150 वर्षों से अधिक के लिए प्रबन्धन प्रौधोगिकियां विकसित करने में अपना योगदान दिया है। यह विश्व के अर्ध उष्णकटिबंधीय क्षेत्र में वानिकी अनुसन्धान की सबसे पुरानी संस्था है। सबसे पुरातन समीक्षित वानिकी जर्नल में से एक इंडियन फारेस्टर इस परिषद द्वारा प्रकाशित किया जाता है। उभरती हुई आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए सम्पादक मंडल में अन्तर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों को सम्मलित करके इंडियन फारेस्टर को एक नया आकार दिया गया है।

4. परिषद, वन अनुसन्धान संस्थान सम विश्वविधालय के द्वारा वानिकी, पर्यावरण प्रबन्धन, काष्ठ विज्ञान एवं प्रौधोगिकी तथा सैलूलोज तथा कागज पर स्नात्कोत्तर कार्यक्रमों के द्वारा उधोगों की मानव संसाधन विकास क्षमता को बढ़ा रही है । हमारे विधार्थियों का 100 प्रतिशत स्थापन रिकार्ड है।
5. परिषद जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र रूप रेखा समझौतें के (यू.एन.एफ.सी.सी.) एक प्रेक्षक के रूप में जलवायु परिवर्तन पर विचार विमर्श में सक्रिय रूप से समिमलित है। परिषद ने कान्फ्रेन्स आफ पार्टीज (सी.ओ.पी.) तथा अधीनस्थ निकायों की बैठकों में नैरो बी तथा बाली में सहभागिता की है। भा.वा.अ.शि.प. वनीकरण तथा पुर्नवनीकरण (एआर) के सैक्टोरल स्कोप के अधीन सी.डी.एम. परियोजनाओं के वैधीकरण, सत्यापन तथा प्रमाणीकरण के लिए जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र रूप रेखा समझौता द्वारा भारत से प्रथम नामित परिचालन ईकाई बन गई है।

6. परिषद ने वन आक्रामक प्रजातियों पर सहभागियों के साथ नेटवर्किंग के लिए एक प्लेटफार्म स्थापित किया है। वन संवर्धन, कृषिवानिकी, जैव प्रौधोगिकी वृक्ष सुधार, काष्ठ प्रौधोगिकी, वन उत्पाद तथा पर्यावरण प्रबन्धन पद्धतियों के क्षेत्र में विकसित प्रौधोगिकियों तथा प्रोटोकाल को लघु अवधि तथा दीर्घावधि पाठयक्रमों, कार्यशालाओं, प्रशिक्षणों तथा जागरूकता कार्यक्रम के द्वारा उपभोक्ता एजेंसियों तक पहुँचाया गया है।


7.परिषद परामर्शी सेवाओं के रूप में विशेषज्ञता को विभिन्न ग्राहकों तक पहुँचाती है । इसमें कुछ जलविधुत फर्म, खनन कम्पनियां, जल आपूर्ति एजेंसियां इत्यादि है। म्युन्सीपैल्टी को वृक्षदार पथों के रखरखाव तथा वृक्ष कुन्जों तथा वृक्षदार पथों के विकास के लिए भी विशेषज्ञता दी जाती है।


8. वानिकी शिक्षा में देशभर में सुधार लाने के लिए वानिकी शिक्षा दे रहे विभिन्न विश्वविधालयों को आर्थिक सहायता उपलब्ध करवाई जा रही है। वानिकी शिक्षा की गुणवत्ता तथा वन अनुसन्धान संस्थान-सम-विश्वविधालय के वानिकी विधाथियों के स्थापन पर विशेष ध्यान दिया जाता है।


9. परिषद देश भर में फैले अपने 9 संस्थानों द्वारा वन निवासियों को तकनीकी कौशल उपलब्ध करवा रही है तथा विभिन्न राज्यों मुख्यत: झारखंड में वन संसाधनों के बेहतर उपयोग से उनकें आजीविका के अवसरों को बढ़ाने के लिए मार्गदर्शन दे रही है।

मुझे आशा है कि यह वेबसाइट आपको हमारे क्रियाकलापों की पर्याप्त जानकारी उपलब्ध करवायेगी। आपसी सम्पर्क में निरन्तर सुधार के लिए मैं आपकी किसी भी प्रतिपुषिट, विशेषत: वानिकी द्वारा आर्थिक रूप से दुर्बल घटकों की आजीविका में सुधार का स्वागत करता हूँ।


डॉ. शशि कुमार, भा.व.से.
महानिदेशक, भा.वा.अ.शि.प.

अस्वीकरण ( डिस्क्लेमर): दिखाई गई सूचना को यथासंभव सही रखने के सभी प्रयास किए गए हैं। वेबसाइट पर उपलब्ध सूचना के अशुद्ध होने के कारण किसी भी व्यक्ति के किसी भी नुकसान के लिए भारतीय वानिकी अनुसन्धान एवं शिक्षा परिषद उत्तरदायी नहीं होगा। किसी भी विसंगति के पाए जाने पर head_it@icfre.org के संज्ञान में लाएं।