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भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद

(पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त निकाय, भारत सरकार )
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उपलब्धियाँ


भा.वा.अ.शि.प. एवं इसके संस्थानों द्वारा अनुसंधान की मुख्य उपलब्धियाँ

भा.वा.अ.शि.प.

  • योजनाओं, परियोजनाओं तथा संस्थानों/केंद्रों की स्वतंत्र समीक्षा के लिए पंचवार्षिक समीक्षा पद्धति को अंगीकृत कर लिया गया है।

  • परामर्शी नियमों को अंतिम रूप दे दिया गया है तथा अंगीकृत कर लिए गए हैं।

  • राज्य कृषि विश्वविद्यालयों के परामर्श के साथ बी.एससी. वानिकी के पाठ्यक्रम को अंतिम रूप दे दिया गया है तथा आई.सी.ए.आर. के पास सहमति हेतु भेज दिया गया है।

  • इ.यू. भारत लघु परियोजनाएं सुविधा कार्यक्रम के अधीन सी.डी.एम.ए/आर के लिए बाधा विश्लेषण अध्ययन संचालित किया गया।

  • रोम, इटली में यू.एन.एफ.सी.सी.सी. कार्यशाला “विकासशील देशों में वनोन्मूलन से उत्सर्जन को कम करना” में सहभागिता।

  • नैरोबी, जीगीरी, अफ्रीका में संयुक्त राष्ट्र कार्यालय में आयोजित संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (सी.ओ.पी. 12/एम.ओ.पी. 2) में सहभ7. महानिदेशक, भा.वा.अ.शि.प. ने दिनांक 7 से 9 मार्च 2007 तक केरन्स, आस्ट्रेलिया में ”विकासशील देशों में वनोन्मूलन से उत्सर्जन को कम करना” की दूसरी कार्यशाला में भाग लिया।

  • भा.वा.अ.शि.प. आई.एस.ओ. 900:2000 प्रमाणीकरण के अनुदान के लिए कार्य कर रहा है। आंतरिक परीक्षकों द्वारा पहला लेखा परीक्षण दिनांक 11 से 13 जुलाई 2006 को आयोजित किया गया। दिनांक 7 से 8 अगस्त 2006 तक परामर्श विकास केंद्र (सी.डी.सी.), नई दिल्ली द्वारा भी छायामात्र लेखा परीक्षण किया गया।

  • परिषद् ने क्षेत्रीय भा.वा.अ.शि.प. के संस्थानों तथा राज्य वन विभागों से प्राप्त सूचना के आधार पर एक ब्रोशर “लघु रूप में प्रकृति (परिरक्षण कथानक) भारत की स्थिति प्रतिवेदन” तैयार किया है।

  • बिहार राज्य के पर्यावरण एवं वन विभाग के सहयोग से बिहार में “समुदाय आधारित समन्वित वन प्रबंधन एवं संरक्षण योजना” पर एक वृहत परियोजना का कार्यान्वयन।

  • वित्तीय वर्ष 2006-07 में 22 विश्वविद्यालयों को ` 700.00 लाख अनुदान के रूप में उपलब्ध करवाए गए।

  • आई टी टी ओ निधियीत परियोजना द्वारा भारत में उष्णकटिबंधीय इमारती लकड़ी तथा अन्य वानिकी उत्पादों के मानदण्डों से संबंधित आंकड़ों के एकत्रीकरण, प्रक्रिया तथा प्रचार को सुगम बनाने के लिए राष्ट्र व्यापी तंत्र की स्थापना।

  • भा.वा.अ.शि.प. के आर.पी.सी. ने 109 परियोजनाओं को प्लान परियोजनाओं के अधीन चलाने की अनुमति दी है।

  • भा.वा.अ.शि.प. के आर.पी.सी. ने 109 परियोजनाओं को प्लान परियोजनाओं के अधीन चलाने की अनुमति दी है।

  • परिषद् ने कोटलीभेल, स्टेज-II (530 एम डब्ल्यू) राष्ट्रीय हाइट्रोइलैक्ट्रिक पावर कार्पोरेशन टिहरी/पौड़ी गढ़वाल परियोजना के लिए पर्यावरण प्रभाग आकलन अध्ययन तथा पर्यावरण प्रबंध योजना का संविन्यास किया।

  • परिषद् ने चंड़ीगढ़ प्रशासन, चंड़ीगढ़ के लिए चंड़ीगढ़ औद्योगिक क्षेत्र, फेज- II में द्रुत पर्यावरण प्रभाव आकलन अध्ययन किया।

  • राष्ट्र भर में विभिन्न एजेंसियों द्वारा कार्यान्वित विज्ञापन वाणिज्य तथा संविदात्मक योजनाओं के अधीन आयुष विभाग राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड द्वारा निधियीत परियोजनाओं का अनुश्रवण एवं मूल्यांकन किया गया।

संस्थान

  • वन अनुसंधान संस्थान ने देश भर से एकत्रित फयूसेरियम सोलानी के 53 आइसोलेटों के लिए कृषि अध्ययन, पी एच का प्रभाव, रोगात्मक प्रतिरोध परीक्षण तथा फफूँद नाशक संवेदनशीलता का अध्ययन किया।.

  • वन अनुसंधान संस्थान, देहरादून ने भितमीरा, हिसार (हरियाणा) (1977)में अंकुर उत्पादन क्षेत्र तथा कृन्तक बीजोद्यान में उगाए गए डेल्बर्जिया सिस्सू के उत्कृष्ट कृन्तकों की पहचान की।.

  • वन अनुसंधान संस्थान, देहरादून ने नई दिल्ली नगरपालिका परिषद् में उगे हुए वृक्षों के स्वास्थ्य मानदण्डों का मूल्यांकन किया तथा वृक्षों की देखभाल के लिए उपयुक्त प्रबंधन कार्यप्रणाली का सुझाव दिया।

  • वन आनुवंशिकी एवं वृक्ष प्रजनन संस्थान, कोयम्बटूर ने लवण सहनशील जीनों के लिए सूचना प्राप्त करने के लिए ‘‘द इन सिलिको जीन बैंक फॉर एबायोटिक स्ट्रेस टालरेन्स- टी.आई.जी.बी.ए.एस.टी.” नामक एक प्रोटोटाइप आधार आंकड़ा वी.ए.एम. डब्ल्यू.ए.एम.पी. पर्यावरण विकसित किया है।

  • वन आनुवंशिकी एवं वृक्ष प्रजनन संस्थान, कोयम्बटूर ने दक्षिण भारत के विभिन्न क्षेत्रों में ई. टैरीटीकार्निस का प्रोविनेन्स प्रोजेनी परीक्षण किया तथा एक यूकेलिप्टस र्केमलडयूलिनसिस तथा ई. टैरीटीकार्निस दो अकुलीन पौध के बीजोद्यान स्थापित किए।

  • वन आनुवंशिकी एवं वृक्ष प्रजनन संस्थान, कोयम्बटूर ने अकेशिया मैनजियम के साथ काला चना, चना तथा ज्वार के चारे के लिए कृषि वानिकी माडल मानकी कृत किए।

  • वन आनुवंशिकी एवं वृक्ष प्रजनन संस्थान, कोयम्बटूर ने औषधीय पादप विथानिया सोमनीफेरा के साथ आंवला आधारित कृषि वानिकी माडल किसानों के खेतों में स्थापित किए।

  • वन आनुवंशिकी एवं वृक्ष प्रजनन संस्थान, कोयम्बटूर ने पहली बार यूकेलिप्टस खेती में लेप्टोसाईबे इनवासा फिशर तथा ला साले (हाइमेनोप्टेरा : यूलोफिडी) आक्रामक नाशिकीट के होने की सूचना दी।

  • वन आनुवंशिकी एवं वृक्ष प्रजनन संस्थान, कोयम्बटूर ने टर्मीनालिया चीबुला के धन वृक्षों के लिए चयन मानदण्ड मानकी कृत किए।

  • वन आनुवंशिकी एवं वृक्ष प्रजनन संस्थान, कोयम्बटूर ने टर्मीनेलिया बेलेरिका के लिए सक्रिय जैव रसायन यौगिकों की अनुमान पद्धित मानकीकृत की।

  • वन आनुवंशिकी एवं वृक्ष प्रजनन संस्थान, कोयम्बटूर ने अण्डमान द्वीप समूह में समुद्री किनारे को स्थायी करने के लिए कैज्वारिना इक्विसीटिफोलिया के 31 हैक्टेयर रोपवनों की स्थापना की।

  • काष्ठ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान, बंगलौर ने गोदावरी घाटी के कबीलों से 426 पादप प्रजातियों पर आंकड़े एकत्र किए जिनमें से 26 अल्प ज्ञात संभाव्य पादप प्रजातियों पर जानकारी पहली बार एकत्रित की गई। दक्षिण भारत से पहली बार एक बहुत दुर्लभ बेंत, केलामस लैटीफोलियस रोक्सब पाया गया।

  • काष्ठ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान, बंगलौर ने चंदन में अधिक पैदावार देने वाले को पहचानने के लिए एक साधारण, कम खर्चीला, उपभोक्ता मित्र तथा क्षेत्रोन्मुख रंग प्रतिक्रिया विकसित की है।

  • काष्ठ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान, बंगलौर द्वारा 6 चयनित चंदन प्रोवीनेनसिस से 12 वर्गों से संबंधित कुल 344 कीटों की पहचान की गई।

  • काष्ठ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान, बंगलौर द्वारा चंदन के चूषक नाशिकीटों पर अध्ययन से चंदन पर प्रजनन करने वाली 73 प्रजातियां संज्ञान में आई। इनमें से 14 प्रजातियों के बारे में पहली बार पता चला।

  • काष्ठ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान, बंगलौर ने आयातित इमारती लकड़ी की 25 प्रजातियों पर एक पुस्तक “दक्षिण भारतीय बाजारों में कुछ आयातित इमारत लकड़ियों के लिए मार्गदर्शक” प्रकाशित की।

  • उष्णकटिबंधीय वन अनुसंधान संस्थान, जबलपुर ने पाया कि टीक बीजोद्यानों में ट्रइकोग्रामा रावोई अण्ड परजीवाम्य का अनुपूरण कीट आक्रमण तथा वार्षिक वृद्धि में नुकसान को कम करने में प्रभावी रहा है।

  • उष्णकटिबंधीय वन अनुसंधान संस्थान, जबलपुर ने पर्यावरण एवं वन मंत्रालय, भारत सरकार को अचानकमार, अमरकन्टक आरक्षित जीवमंडल पर कम्पेंडियम तैयार करके दिया है।

  • उष्णकटिबंधीय वन अनुसंधान संस्थान, जबलपुर ने एक्रोडिकटिइला तथा कैम्लोमाइसिस नामक कवक के नए वंशों की पहचान पहली बार की यह विज्ञान जगत के लिए बिल्कुल नए हैं।

  • उष्णकटिबंधीय वन अनुसंधान संस्थान, जबलपुर ने एन्जाइम उत्पादन के लिए गैनोड्रमा ल्यूसीडम के चार स्टेनों को छांट कर अलग किया जिनका औषधीय महत्व है।

  • उष्णकटिबंधीय वन अनुसंधान संस्थान, जबलपुर ने रौवोल्फिया सर्पेटिना, एण्ड्रोग्रफिस पैनीकुलाटा, जैमनीमा सालवैस्ट्री तथा टिनोस्पोरा कार्डिफोलिया की कृषि तकनीकों को मानकीकृत किया।

  • उष्णकटिबंधीय वन अनुसंधान संस्थान, जबलपुर ने टर्मीनालिया अर्जुना, रौवोल्किया सर्पेमटीना, एण्ड्रोग्राफिस पैनीकुलाटा, जिमजीमा सालर्वेस्ट्री तथा टिनोस्पोरा कार्डिफोलिया की अविनाशकारी कटाई कार्यप्रणाली विकसित की।
 

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