भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद

(पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त निकाय, भारत सरकार )
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भा.वा.अ.शि.प. के बारे में


परिचय


भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद्, जो राष्ट्रीय वानिकी अनुसंधान तंत्र में एक शीर्ष संस्था है, वानिकी के सभी पहलुओं पर अनुसंधान, शिक्षा और विस्तार की आवश्यकता आधारित आयोजना, प्रोत्साहन, संचालन एवं समन्वयन करके वानिकी अनुसंधान का वास्तविक विकास कर रही है। परिषद् विश्व चिंताओं जैसे जलवायु परिवर्तन, जैवविविधता का संरक्षण, रेगिस्तानीकरण को रोकना और संसाधनों का पोषणीय प्रबंध एवं विकास सहित इस सेक्टर में उभर रहे विषयों के अनुरूप समाधान आधारित वानिकी अनुसंधान करती है। परिषद् द्वारा सामयिक अनुसंधान प्राकृतिक संसाधन प्रबंध से संबंधित चुनौतियों का सफलतापूर्वक संचालन करने के लिए, वन प्रबंधकों एवं शोधार्थियों की क्षमता में लोगों के विश्वास को बढ़ाता है।

 

परिषद् के उद्देश्य

  • वानिकी अनुसंधान और शिक्षा एवं इनके अनुप्रयोग के लिए सहायता और प्रोत्साहन देना तथा समन्वयन करना ।

  • वानिकी तथा अन्य संबद्ध विज्ञानों के लिए राष्ट्रीय पुस्तकालय एवं सूचना केंद्र को विकसित करना और उसका रखरखाव करना ।

  • वनों और वन्य प्राणियों से संबंधित सामान्य सूचना और अनुसंधान के लिए एक वितरण केंद्र के रूप में कार्य करना ।

  • वानिकी विस्तार कार्यक्रमों को विकसित करना तथा उन्हें जन संचार, श्रव्य-दृश्य माध्यमों और विस्तार मशीनरी द्वारा प्रसारित करना ।

  • वानिकी अनुसंधान, शिक्षा और संबद्ध विज्ञानों के क्षेत्र में परामर्शी सेवाएं प्रदान करना ।

  • उपर्युक्त उद्देश्यों की पूर्ति के लिए अन्य सभी आवयश्क कार्य करना ।


परिषद् के अधीन संस्थान एवं केंद्र


राष्ट्र की वानिकी अनुसंधान आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए देश के विभिन्न जैव-भौगोलिक क्षेत्रों में स्थित परिषद् के आठ क्षेत्रीय अनुसंधान संस्थान तथा चार अनुसंधान केंद्र हैं। क्षेत्रीय अनुसंधान संस्थान देहरादून, कोयम्बटूर, बंगलुरू, जबलपुर, जोरहाट, जोधपुर, शिमला और रांची में तथा केंद्र इलाहाबाद, छिंदवाड़ा, हैदराबाद और आइजॉल में स्थित हैं।

परिषद् के अधीन अनुसंधान संस्थान हैः

  • वन अनुसन्धान संस्थान (व.अ.सं.), देहरादून
  • वन आनुवंशिकी एवं वृक्ष प्रजनन संस्थान (व.आ.वृ.प्र.सं.), कोयम्बटूर

  • काष्ठ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान(का.वि.प्रौ.सं.), बंगलौर

  • उष्णकटिबंधीय वन अनुसन्धान संस्थान (उ.व.अ.सं.), जबलपुर
  • वर्षा वन अनुसन्धान संस्थान(व.व.अ.सं.), जोरहाट

  • शुष्क वन अनुसन्धान संस्थान (शु.व.अ.सं.), जोधपुर

  • हिमालयन वन अनुसन्धान संस्थान (हि.व.अ.सं.), शिमला

  • वन उत्पादकता संस्थान (व.उ.सं.), रांची

  • वन जैवविविधता संस्थान (आईएफबी), हैदराबाद

परिषद् के अधीन उन्नत अनुसंधान केंद्र हैः

  • सामाजिक वानिकी एवं पारि-पुनर्स्थापन केन्द्र (सा.वा.पा.पु.कें.), इलाहाबाद

  • वानिकी अनुसंधान एवं मानव संसाधन विकास केन्द्र (वा.अ.मा.सं.वि.कें.), छिंदवाड़ा

  • बांस और बेंत के लिए उन्नत अनुसन्धान केन्द्र (बां.बें.उ.अ.कें.), आइजॉल

 

 

अस्वीकरण ( डिस्क्लेमर): दिखाई गई सूचना को यथासंभव सही रखने के सभी प्रयास किए गए हैं। वेबसाइट पर उपलब्ध सूचना के अशुद्ध होने के कारण किसी भी व्यक्ति के किसी भी नुकसान के लिए भारतीय वानिकी अनुसन्धान एवं शिक्षा परिषद उत्तरदायी नहीं होगा। किसी भी विसंगति के पाए जाने पर head_it@icfre.org के संज्ञान में लाएं।