भा.वा.अ.शि.प. के संस्थानों द्वारा अद्यतन

 दिनांक ३० जून, २०२० को "उत्तर पूर्व भारत में चारा संसाधनों की जैव-विविधता और एकीकृत कृषि प्रणाली में उनकी गुंजाइश" विषय पर वर्षा वन अनुसंधान संस्थान, जोरहाट (असम) द्वारा आयोजित मासिक सेमिनार पर एक रिपोर्ट  व.व.अ.सं.:   02 July 2020

 वन आनुवंशिकी एवं वृक्ष प्रजनन संस्थान, कोयंबटूर और पसुमई विकटन (अग्रणी कृषि पत्रिका), चेन्नई द्वारा "कृषि आय बढ़ाने के लिए वृक्ष संवर्धन" विषय पर दिनांक १०.०३.२०२० और ११.०३.२०२० को संयुक्त रूप से आयोजित वेबिनार श्रृंखला पर एक रिपोर्ट  व.आ.वृ.प्र.सं.:   02 July 2020

 वर्षा वन अनुसन्धान संस्थान, जोरहाट में दिनांक ३० जून, २०२० को राजभाषा हिंदी के प्रगामी प्रयोग को बढ़ावा देने हेतु हिंदी कार्यशाला के आयोजन पर एक रिपोर्ट  व.व.अ.सं.:   02 July 2020

 वन उत्पादकता संस्थान, रांची द्वारा दिनांक २१ जून, २०२० को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर "घर पर योग, परिवार के साथ योग" थीम के अनुसार डिजिटल माध्यम के उपयोग से आभासीय उपस्थिति द्वारा किये गए आयोजन पर एक रिपोर्ट  व. उ. सं.:   26 June 2020

 "कोविद महामारी पश्चात् युग में पर्यावरण और वन प्रबंधन" विषय पर वन अनुसंधान केंद्र - इको-पुनर्वास, प्रयागराज द्वारा १९ जून, २०२० को आयोजित राष्ट्रीय वेबिनार पर एक रिपोर्ट  व.अ.कें. ई.पु.:   25 June 2020

 शुष्क वन अनुसंधान संस्थान,जोधपुर में दिनांक १० जून, २०२० को विभागीय राजभाषा कार्यान्वयन समिति की तिमाही बैठक के आयोजन पर एक रिपोर्ट  श.व.अ.सं.:   23 June 2020

 शुष्क वन अनुसन्धान संस्थान, जोधपुर में दिनांक १७ जून, २०२० को मरू-प्रसार रोक दिवस के आयोजन पर एक रिपोर्ट  श.व.अ.सं.:   23 June 2020

 दिनांक १८ जून, २०२० को वन अनुसंधान संस्थान की राजभाषा कार्यान्वयन समिति की तिमाही बैठक के आयोजन पर एक रिपोर्ट   व.अ.सं.:   19 June 2020

 वन आनुवंशिकी एवं वृक्ष प्रजनन संस्थान, कोयम्बटूर द्वारा ०५ जून, २०२० को विश्व पर्यावरण दिवस - २०२० के अवलोकन पर एक रिपोर्ट   व.आ.वृ.प्र.सं.:   17 June 2020

 हिमालयन वन अनुसंधान संस्थान, शिमला द्वारा दिनांक ०५ जून, २०२० को विश्व पर्यावरण दिवस के आयोजन पर एक रिपोर्ट   हि.व.अ.सं.:   17 June 2020

 शुष्क वन अनुसन्धान संसथान, जोधपुर में दिनांक ०५ जून, २०२० को पर्यावरण दिवस के आयोजन पर एक रिपोर्ट  श.व.अ.सं.:   16 June 2020

 वन जैव विविधता संस्थान, हैदराबाद द्वारा ०५ जून, २०२० को विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में, जैव विविधता के महत्व के बारे में जागरूकता फैलाने और जैव विविधता हानि सहित वैश्विक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने के उद्देश्य से किये गए आयोजन पर एक रिपोर्ट  व.जै.सं.:   13 June 2020

 जैव विविधता संरक्षण, प्रबंधन और स्थायित्व के महत्व के बारे में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से २२.०२.२०२० को वन जैव विविधता संस्थान, हैदराबाद में अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस के आयोजन पर एक रिपोर्ट  व.जै.सं.:   13 June 2020

 पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा प्रायोजित हरित कौशल विकास कार्यक्रम, के अंतर्गत "बांस प्रसार और प्रबंधन" विषय पर दिनांक १२ फरवरी २०२० से वन अनुसंधान केंद्र - इको-पुनर्वास, प्रयागराज द्वारा आयोजित ३८ दिनों के सर्टिफिकेट कोर्स पर एक रिपोर्ट  व.अ.कें. ई.पु.:   12 June 2020

 वर्षा वन अनुसंधान संस्थान, जोरहाट द्वारा 'भारतीय हिमालय क्षेत्र में जल सुरक्षा हेतु जल अभ्यारण्य अभियान' के अंतर्गत सर्वेयरों के लिए स्प्रिंग इन्वेंटरी विकसित करने के विषय में, ७ सितम्बर, २०१९ को अरुणाचल पाली विद्यापीठ सोसाइटी, चौखम, नम्साई में आयोजित एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम एक रिपोर्ट   व.व.अ.सं.:   11 June 2020

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भा.वा.अ.शि.प.की प्रौद्योगिकी

  जूनीपेरस पॉलीकार्पस (हिमालयन पेन्सिल सीडार) की बीज प्रौद्योगिकी

जुनिपेरस पाॅलीकार्पोस, सी.कोच उत्तर पश्चिम हिमालयन क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण देशज शंकु वृक्ष है, जिसे सामान्यतः हिमालयन पेंसिल सिडार के नाम से जाना जाता है। इस प्रजाति के बीजों में प्रसुप्ति होती है, जो इसके अंकुरण को प्रभावित करती है। 

  कुटकी बहुगुणन हेतु वृहद-प्रसार तकनीक

पिकोरिजा कुरूआ, रायल एक्स बेंथ जिसे सामान्यतः कुटकी के नाम से जाना जाता है, यह पश्चिमी हिमालय में पाया जाना महत्वपूर्ण शीतोष्ण औषधी पादप है, जिसकी उच्च शीतोष्ण क्षेत्रों (2700 मी. से ऊपर) में वाणिज्यिक कृषि हेतु महत्वपूर्ण संभाव्यता है।

  मुशाकबला बहुगुणन हेतु बृहद-प्रसार तकनीक

वैलरियाना जटामांसी, जोन्स जिसे सामान्यतः मुशाकबला के नाम से जाना जाता है, यह पश्चिमी हिमालय में पाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण शीतोष्ण औषधी पादप है तथा वाणिज्यिक कृषि हेतु महत्वपूर्ण संभाव्यता रखता है।

  देवदार निष्पत्रक (एक्ट्रोपिस देवदारे प्राउट) का एकीकृत कीट प्रबंधन

देवदार (सिडेरस देओदारा), उत्तर-पश्चिम हिमालय का एक अति मूल्यित एवं बहुल शंकु प्रजाति है, यह कुछ अंतरालों पर निष्पत्रक, इक्ट्रोपिस देओदारी प्राउट (लेपीडोप्टेरा: जिओमैट्रिडि) से प्रभावित होता है। यह प्रमुख नाशी-कीट देवदार वनों की अल्पवयस्क फसलों को गम्भीरता से प्रभावित करता है।

  बागवानी रोपण के साथ शीतोष्ण औषधीय पादपों का अंतरफसलीकरण

उच्च पहाड़ी शीतोष्ण क्षेत्रों के बागानों में अंतरालों का बेहतर उपयोजन किया जा सकता है तथा चुनिंदा वाणिज्यिक रूप से महत्वपूर्ण औषधीय पादपों के अंतरफसलीकरण से बागानों द्वारा आर्थिक लाभ की वृद्धि की जा सकती है।

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