आगामी आयोजन

 वन अनुसंधान केंद्र - इको-पुनर्वास, प्रयागराज आपको २ मार्च २०२१ को प्रो० आर० मिश्रा मेमोरियल व्याख्यान के लिए आमंत्रित करता है  updated: 23 February 2021

 वर्षा वन अनुसंधान संस्थान, जोरहाट (असम) अपने कैंपस में 15-17 फरवरी, 2021 से युवाओं को बम्बू शूट प्रोसेसिंग प्रशिक्षण में भाग लेने के लिए आमंत्रित करता है  updated: 01 February 2021

 राष्ट्रीय उद्यमिता और लघु व्यवसाय विकास के लिए राष्ट्रीय संस्थान के सहयोग से पर्यावरणीय सूचना प्रणाली (इनव् ीस ) और वन अनुसंधान केंद्र, ईको-रिहैबिलिटेशन प्रयागराज द्वारा २९ जनवरी २०२१ को छात्रों के लिए ऑनलाइन प्रवेश परीक्षा कार्यक्रम (ईएपी) के लिए आपको आमंत्रित करता है  updated: 25 January 2021

 वन अनुसंधान केंद्र - इको-पुनर्वास, प्रयागराज आपको १८ -१९ मार्च २०२१ को "कम ज्ञात पौधों (संरक्षण) के संरक्षण, प्रबंधन और सतत उपयोग" पर ऑनलाइन अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन सार सबमिशन की विस्तारित अंतिम तिथि 28 फरवरी 2021 तक आमंत्रित करता है  updated: 21 January 2021

 आई.एफ.जी.टी.बी. कोयम्बटूर और पसुमई विकटन द्वारा संयुक्त रूप से ०५ जून से २६ जून, २०२० के दौरान "कृषि आय बढ़ाने के लिए वृक्ष संवर्धन कार्यप्रणालियों" विषय पर ऑनलाइन सत्र का आयोजन किया जायेगा   updated: 03 June 2020

 वन अनुसंधान संस्थान, देहरादून में 2020 में लघु अवधि के प्रशिक्षण पाठ्यक्रम का कैलेंडर  updated: 24 January 2020

भा.वा.अ.शि.प. के संस्थानों द्वारा अद्यतन

 वन अनुसंधान केंद्र - इको-पुनर्वास, प्रयागराज के द्वारा २७ फरवरी २०२१ को कृषि विज्ञान केंद्र, बलिया में "पूर्वी उत्तर प्रदेश में कृषि खेती के विष्तार" पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम पर एक रिपोर्ट  व.अ.कें. ई.पु.:   04 March 2021

 वन अनुसंधान केंद्र - इको-पुनर्वास, प्रयागराज द्वारा २०-२२ फरवरी, २०२१ "वानिकी प्रौद्योगिकी प्रदर्शन" आयोजन पर एक रिपोर्ट  व.अ.कें. ई.पु.:   02 March 2021

 वन अनुसंधान केंद्र - इको-पुनर्वास, प्रयागराज द्वारा २०-२१ फरवरी, २०२१ "क्षेत्रीय पुष्प और सब्जी प्रदर्शनी कंपनी गार्डन, प्रयागराज में प्रदर्शनी स्टाल" आयोजन पर एक रिपोर्ट  व.अ.कें. ई.पु.:   02 March 2021

 ११ -१२ फरवरी, २०२१ के दौरान किसान मेला सह प्रदर्शनी कार्यक्रम में वन उत्पादकता संस्थान, रांची की भागीदारी पर एक रिपोर्ट  व. उ. सं.:   01 March 2021

 वन उत्पादकता संस्थान,रांची द्वारा १४ जनवरी २०२१ को आयोजित "वाइल्ड एडिबल फ्रूटिंग स्पीशीज" सेमिनार पर एक रिपोर्ट  व. उ. सं.:   01 March 2021

 वन उत्पादकता संस्थान,रांची द्वारा ५ फरवरी २०२१ को आयोजित मासिक सेमिनार "एफजीआर के जैव विविधता संरक्षण, जलवायु परिवर्तन और इन-विट्रो संरक्षण" पर एक रिपोर्ट  व. उ. सं.:   01 March 2021

 वन उत्पादकता संस्थान, रांची के द्वारा मानव संसाधन विकास योजना (HRD) कार्यक्रम के तहत भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद, देहरादनु द्वारा पर्योजित ई-पर्क्यरुमेंट एवं परचेज मैनेजमेंट, स्टोरकीपीगं और रि कॉर्ड मेंन्टेनेस विषय पर दो दिवसीय(12/01/2021 से 13/01/2021तक) प्रशिक्षण कार्यक्रम के आयोजन पर एक रिपोर्ट  व. उ. सं.:   01 March 2021

 वर्षा वन अनुसंधान संस्थान, जोरहाट द्वारा १५ -१७ फरवरी, २०२१ तक एवं बांस तकनीकी सहायता समूह- भा.वा.अ.शि.प. द्वारा प्रायोजित बांस शूट प्रोसेसिंग पर आयोजित तीन दिवसीय प्रशिक्षण पर एक रिपोर्ट  व.व.अ.सं.:   01 March 2021

 जम्मू और कश्मीर सरकार के उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ पूर्वोत्तर बेंत और बांस विकास परिषद ,बरनिहाट (असम) के अधिकारियों के साथ २६ फरवरी २०२१ को वर्षा वन अनुसंधान संस्थान, जोरहाट (असम) के दौरे पर एक रिपोर्ट  व.व.अ.सं.:   01 March 2021

 भारतीय वन सेवा के अधिकारियों के लिए "वन की सतत विकास में भूमिका" पर वर्चुअल मोड के माध्यम से वर्षा वन अनुसंधान संस्थान, जोरहाट (असम) द्वारा ४ -५ फरवरी, २०२१ तक दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजन पर एक रिपोर्ट  व.व.अ.सं.:   23 February 2021

 वर्षा वन अनुसंधान संस्थान, जोरहाट द्वारा ९ से ११ फरवरी, २०२१ तक "बांस चारकोल उत्पादन और ब्रिकेटिंग" पर आयोजित तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम पर एक रिपोर्ट  व.व.अ.सं.:   23 February 2021

 वन आनुवांशिक संसाधन और वृक्ष सुधार पर वन आनुवंशिकी एवं वृक्ष प्रजनन संस्थान, कोयम्बटूर के ENVIS केंद्र द्वारा आयोजित तीन ग्रीन स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम (GSDP) पर एक रिपोर्ट  व.आ.वृ.प्र.सं.:   22 February 2021

 वन अनुसंधान केंद्र - इको-पुनर्वास, प्रयागराज और हेमवती नंदन बागुन पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज, नानी, प्रयागराज के बीच अनुसंधान और शिक्षा में ज्ञान साझा करने के लिए ज्ञापन (एमओयू) डॉ० संजय सिंह, प्रमुख, एफआरसीईआर, प्रयागराज और डॉ० सुनंदा चतुर्वेदी ,प्रिंसिपल, एचएनबी पीजी कॉलेज, नानी, प्रयागराज द्वारा १३ फरवरी,२०२१ को हस्ताक्षर किये गए पर एक रिपोर्ट  व.अ.कें. ई.पु.:   22 February 2021

 वन अनुसंधान केंद्र - इको-पुनर्वास, प्रयागराज के तत्वावधान में माघ मेला में "लाख की खेती "के विषय में ग्रीन गोल्ड फामासा कोआपरेटिव , प्रयागराज के साझा साथ से 12.02.2021 को एक दिवसीय कृषक प्रशिक्षण का आयोजन किया गया  व.अ.कें. ई.पु.:   22 February 2021

 भारतीय वन अनुसंधान और शिक्षा परिषद (भा.वा.अ.शि.प. ), देहरादून द्वारा १७ से २० फरवरी, २०२१ तक रायपुर में आयोजित "राज्य REDD + एक्शन प्लान की तैयारी के लिए छत्तीसगढ़ राज्य वन विभाग की क्षमता निर्माण के लिए हितधारकों के परामर्श और विशेषज्ञ कार्यशालाओं" पर एक रिपोर्ट  भा.वा.अ.शि.प. :   22 February 2021

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भा.वा.अ.शि.प.की प्रौद्योगिकी

  जूनीपेरस पॉलीकार्पस (हिमालयन पेन्सिल सीडार) की बीज प्रौद्योगिकी

जुनिपेरस पाॅलीकार्पोस, सी.कोच उत्तर पश्चिम हिमालयन क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण देशज शंकु वृक्ष है, जिसे सामान्यतः हिमालयन पेंसिल सिडार के नाम से जाना जाता है। इस प्रजाति के बीजों में प्रसुप्ति होती है, जो इसके अंकुरण को प्रभावित करती है। 

  कुटकी बहुगुणन हेतु वृहद-प्रसार तकनीक

पिकोरिजा कुरूआ, रायल एक्स बेंथ जिसे सामान्यतः कुटकी के नाम से जाना जाता है, यह पश्चिमी हिमालय में पाया जाना महत्वपूर्ण शीतोष्ण औषधी पादप है, जिसकी उच्च शीतोष्ण क्षेत्रों (2700 मी. से ऊपर) में वाणिज्यिक कृषि हेतु महत्वपूर्ण संभाव्यता है।

  मुशाकबला बहुगुणन हेतु बृहद-प्रसार तकनीक

वैलरियाना जटामांसी, जोन्स जिसे सामान्यतः मुशाकबला के नाम से जाना जाता है, यह पश्चिमी हिमालय में पाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण शीतोष्ण औषधी पादप है तथा वाणिज्यिक कृषि हेतु महत्वपूर्ण संभाव्यता रखता है।

  देवदार निष्पत्रक (एक्ट्रोपिस देवदारे प्राउट) का एकीकृत कीट प्रबंधन

देवदार (सिडेरस देओदारा), उत्तर-पश्चिम हिमालय का एक अति मूल्यित एवं बहुल शंकु प्रजाति है, यह कुछ अंतरालों पर निष्पत्रक, इक्ट्रोपिस देओदारी प्राउट (लेपीडोप्टेरा: जिओमैट्रिडि) से प्रभावित होता है। यह प्रमुख नाशी-कीट देवदार वनों की अल्पवयस्क फसलों को गम्भीरता से प्रभावित करता है।

  बागवानी रोपण के साथ शीतोष्ण औषधीय पादपों का अंतरफसलीकरण

उच्च पहाड़ी शीतोष्ण क्षेत्रों के बागानों में अंतरालों का बेहतर उपयोजन किया जा सकता है तथा चुनिंदा वाणिज्यिक रूप से महत्वपूर्ण औषधीय पादपों के अंतरफसलीकरण से बागानों द्वारा आर्थिक लाभ की वृद्धि की जा सकती है।

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